



समाज के साथ दिव्यांगजनों के सम्मान का भी संकल्प
सोनभद्र। नशामुक्त समाज के निर्माण और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित नशा मुक्ति संकल्प यात्रा के तहत आज निर्धारित गांवों में जनसंपर्क एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। यात्रा मडरा, बिसुंधरी, सेंधुरी, रैपुरा, बराक, बरौली और सोनवट होते हुए बिछिया गांव पहुंची, जहां आज के कार्यक्रम का समापन हुआ। यात्रा के दौरान मशाल जुलूस निकालकर ग्रामीणों को नशे से दूर रहने, परिवारों को सुरक्षित रखने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अभियान में सैकड़ों ग्रामीणों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने मशाल प्रज्वलित कर देश के जाने-माने हास्य कलाकार एवं अभियान का नेतृत्व कर रहे अभय कुमार शर्मा को सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। विशेष रूप से माताओं और बहनों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार को नशे की बुराई से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने में उनकी अहम भूमिका है।
अभियान का नेतृत्व कर रहे अभय कुमार शर्मा ने सोनभद्र में नशे की समस्या के सामाजिक और भौगोलिक पहलुओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोनभद्र चार राज्यों की सीमाओं से जुड़ा जिला है। ऐसे भौगोलिक कारणों से यह नशीले पदार्थों की आपूर्ति के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र बन सकता है। युवाओं में अशिक्षा और जागरूकता की कमी का लाभ उठाकर नशे के कारोबार से जुड़े लोग उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। इसका दुष्परिणाम केवल युवा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है और अनेक परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाते हैं।
उन्होंने आगामी चुनावों के संदर्भ में लोगों को सचेत करते हुए कहा कि चुनाव के समय कुछ लोग शराब, नशीले पदार्थों या अन्य प्रलोभनों के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे प्रलोभनों से बचना और अपने विवेक से निर्णय लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज के सामने एक महत्वपूर्ण चुनाव नशा अपनाने और नशे से दूर रहने के बीच भी है। हमें नशामुक्त जीवन और स्वस्थ भविष्य का चुनाव करना चाहिए। त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर पहले लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते थे, लेकिन नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण कई लोग घरों में ही नशा करके पड़े रहते हैं। इससे सामाजिक मेलजोल और भाईचारा कमजोर पड़ता है। परिवारों में तनाव, घरेलू हिंसा और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
अभय कुमार शर्मा ने आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझाते हुए कहा कि शराब और नशे पर खर्च होने वाला पैसा परिवार की खुशहाली छीन सकता है। यदि यही पैसा बच्चों की किताबों, शिक्षा और बेहतर भविष्य पर खर्च किया जाए, तो वही बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, वैज्ञानिक और समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शराब और तंबाकू जैसे हानिकारक पदार्थों का सेवन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है, जबकि बच्चों की शिक्षा में किया गया निवेश उन्हें भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारियों के उपचार और मानव सेवा के योग्य बना सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से नशे से दूर रहने तथा शिक्षा और संस्कारों को प्राथमिकता देने की अपील की।
गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के संस्थापक रवि प्रकाश चौबे ने कहा कि नशामुक्ति केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को तिरस्कार करने के बजाय उन्हें सहयोग, सही मार्गदर्शन और उपचार के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और ग्रामीणों से अपील की कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं, ताकि नशे के विरुद्ध जागरूकता एक स्थायी सामाजिक आंदोलन का रूप ले सके।
अभियान के ब्रांड एंबेसडर अरुण शंकर पाठक ने अपने अनुभवों के आधार पर कहा कि नशे की लत से बाहर निकलना संभव है। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और उचित मार्गदर्शन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशे से जूझ रहे लोगों को अकेला छोड़ने के बजाय उनका हाथ थामना चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन में लौट सकें। उनका प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाए।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों को प्राथमिकता देना रहा। इस अवसर पर क्षेत्र के पांच दिव्यांगजनों को सम्मानित किया गया। स्वयं दिव्यांग होने के बावजूद अपनी प्रतिभा और मेहनत से पहचान बनाने वाले अभय कुमार शर्मा ने कहा कि जिस गांव या क्षेत्र से यह यात्रा गुजरेगी, वहां के दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने और उन्हें सरकारी योजनाओं, बेहतर शिक्षा तथा चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलना चाहिए। नशामुक्ति के साथ दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों का संदेश भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यात्रा के संयोजक एवं यूथ आइकॉन सौरभ कांत पति तिवारी ने कहा कि नशा मुक्ति संकल्प यात्रा को जनपद सोनभद्र के प्रत्येक गांव और शहर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा के माध्यम से लोगों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करने के साथ नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि नशामुक्त सोनभद्र का सपना जनभागीदारी से ही साकार हो सकता है। इसके लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, युवाओं, महिलाओं और सभी जागरूक नागरिकों को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, ग्रामीणों और आयोजन मंडल के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रभात सिंह चंदेल ने किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान राजेंद्र मौर्य, संतपति मिश्रा, लीलामणि पटेल, राकेश मिश्रा, अनिल मौर्य, सुनील शुक्ला, चंद्रकांत पति तिवारी, अखिलेश्वर नाथ द्विवेदी, बबलू, इमरान अंसारी, कुद्दूस अंसारी सहित आयोजन मंडल के सदस्य और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान लोगों ने नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेते हुए जनजागरूकता के नारों के माध्यम से संदेश दिया कि नशे से दूरी, परिवार में खुशहाली और समाज में समानता एवं सम्मान ही एक स्वस्थ जनपद की पहचान है।
